गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर जहां विभिन्न देशों के बीच हो रहे युद्धों के कारण व्यापारिक अस्थिरता के कारण कई देशों की वर्तमान वित्तीय वर्ष में कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था संतोष जनक स्थिति में नहीं है,वही भारत की वर्तमान वित्तीय वर्ष यानी 2026 से 27 के बीच प्रथम तिमाही अप्रैल से जून के बीच जी डी पी का दर 7.8 प्रतिशत का होना सुखद आश्चर्य प्रतीत हो रहा है। उल्लेखनीय है कि किसी भी देश के विकास का राष्ट्रीय पैमाना उस देश का जी डी पी के विकास स्तर से ही निर्धारित किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा आम जनमानस के बीच बढ़ते हुए जी डी पी के दर के कारण खुशी का इजहार किया,वही दूसरी तरफ आम नागरिकों से वर्तमान समय में सोना ना खरीदने तथा विदेशों में जाकर शादी ना कर, अपने देश की धरती में शादी करने की अपील की।
गौरतलब है कि जो पढ़े लिखे हुए लोग जो हल्का सा भी अर्थ व्यवस्था के बारे में जानकारी रखते हैं उनको माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा किया गया अपील को समझने में कोई विशेष परेशानी नहीं हुआ, परंतु आम नागरिकों को उनकी अपील इस कारण नहीं समझा आया कि उन आम जनमानस का कहना है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के जी डी पी के सम्बन्ध में घोषणा से तो यही साबित होता है कि भारत आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है, फिर हम आम नागरिकों को सोना खरीदने एवं विदेशों में शादी करने की मनाही क्यों ?
उल्लेखनीय है कि इसका उत्तर भारतीय अर्थशास्त्रियों द्वारा बड़ा ही स्पष्ट तौर पर दिया गया है,इन अर्थ शास्त्रियों का कहना है कि आम नागरिकों की सोना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू सरकार द्वारा अपना जमा किए गए विदेशी मुद्रा को खर्च करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ अगर विदेशों में जाकर हमारे नागरिकों द्वारा अगर शादी किया जाता है तो वहां की मुद्रा में खर्च करने के कारण उस देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती आयेगी, जिस देश में शादी किया जाएगा। इससे स्वाभाविक तौर पर भारतीय अर्थ व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। जिससे आने वाले निकट वित्तीय वर्ष में जी डी पी के दर भी प्रभावित हो सकता है।
आप सबों का,
दिवाकर,