अंग्रेजी विषय के महत्वपूर्ण लेखक शेक्सपियर ने कहा है कि जब कोई विद्यार्थी को जाने अनजाने अपने समाज या राज्य स्तर पर किसी कारण प्रसिद्धि प्राप्त करने का मौका मिल जाता है तो वह विद्यार्थी अपने मूल कर्तव्यों से भटककर वह और अधिक मशहूर होने के लिए अपने नए नए हथकंडे अपनाने का प्रयास करते रहता है। यह बल्कि उसी तरह है जब कोई हिंसक पालतू शाकाहारी जानवर को उसके मालिक द्वारा किसी भी प्रकार जाने अनजाने कोई मांस का टुकड़ा दे दिया जाता है तो फिर वह शाकाहारी भोजन करना बिलकुल पसंद नहीं करता है।
गौरतलब है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय द्वारा एक की गई टिप्पणी के पश्चात एक अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्र द्वारा एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बातों बात में कॉकरोच जनता पार्टी नामक पार्टी का गठन कर दिया। संजोग वश सरकारी मशीनरी के लापरवाही पश्चात् नित पेपर लीक का मामला हो गया।हालांकि इसको किसी भी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता है।यह सरकार की नैतित एवं प्रशासनिक जिम्मेवारी होती है कि ऐसी घटनाओं के पुनरावृति होने पर पूरी तरह से रोक लगानी चाहिए।
दूसरी ओर मुझे कहने का यह मतलब बिलकुल नहीं है कि सरकारी सिस्टम द्वारा किसी भी प्रकार की गई लापरवाही को सुधार करने हेतु सरकार से मांग नहीं करे या जिम्मेवार संबंधित दोषी पदाधिकारियों को दण्डित ना करे। बल्कि मैं तो कहता हूँ कि इन दोषी पदाधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर सरकार द्वारा यथाशीघ्र उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सीजेपी पार्टी द्वारा नित पेपर लीक मामले को लेकर भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसके पाश्चात्य स्वाभाविक तौर से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये पुलिस प्रशासन द्वारा बल का भी प्रयोग किया गया, इसमें स्वाभाविक रूप से कुछ प्रदर्शनकारी को गंभीर रूप से जख्मी भी हो गए थे।
उल्लेखनीय है कि कोइ भी पुलिस प्रशासन या कही कि सरकार हो या केंद्र सरकार हो , उसके संबंधित जिम्मेवार प्रतिनिधियों को कोई प्रदर्शन कारियों से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं होती है, बल्कि सरकार के क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये थोड़े बहुत बल प्रयोग किया ही जाता है।
परन्तु सीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार से खासकर इसके मुखिया माननीय प्रधानमंत्री जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना कहीं से भी शोभा नहीं देता है। उल्लेखनीय है कि इन सीजेपी कार्यकर्ताओं को कुछ मीडिया चैनलों द्वारा अपने व्यू बढ़ाने के लिए उनको काफी बढ़ चढ़ कर दिखाया गया। यही नहीं आग में घी देने का कार्य बिपक्षी पार्टियों द्वारा भी किया गया
हमे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इसके तथाकथित अध्यक्ष और मुख्य कार्यकर्ताओं द्वारा अरविंद केजरीवाल की तरह राजनीति में सुनहले सपने देखने लगे। विशेषकर माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा देश में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया तो,उन्हे लगा कि अब तो पूरे भारत में अगले राजनेता सीजेपी पार्टी के सदस्य ही होंगे।
मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि इसके मुख्य नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा जिस तरह चर्चा में बने रहने के लिए बयानबाजी किया जा रहा है, अगर इसमें सुधार नहीं किया गया तो ये लोग अपने मूल कर्तव्य से भटककर खाई में अवश्य गिरेंगे। जरूरत इस बात की है कि इनको राजनीति के मुंगेरी लाल के हसीन सपना छोड़कर अपने पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
आप सबों का,,
दिवाकर,