Explore & Learn: Insightful blogs, knowledge & perspectives by Nandkumar Diwakar
radhakrishanglobalknowledge.com

Search Knowledge Base & Blogs

Tip: Press ESC anytime to close search window

General Knowledge 1 min read

।। भगवान श्री बलराम जी द्वारा बालबन दैत्य का उद्धार करने के पश्चात तीर्थयात्रा पर जाना,।।

महात्मा श्री शुकदेव जी भागवत कथा सुनाने के क्रम में राजा परीक्षित जी से कहते हैं कि राजन, भगवान श्री बलराम जी तीर्थ यात्रा करने के उद्देश्य से द्वारिका नगरी से निकलकर जगह जगह संत महात्माओं के दर्शन करते हुए, प्रभास क्षेत्र में पहुंचे हुए थे कि वहाँ के निवास करने वाले महात्माओं ने कहा कि प्रभु हमलोग एक दैत्य से काफी परेशान हो रहे हैं, वह दैत्य हमलोग सभी संतों के नित्य प्रति पूजा पाठ को बाधित करने के साथ ही हमलोगों द्वारा मानव के कल्याण हेतू एक यज्ञ का आयोजन किया गया था, जिसमे वह मल्ल,मूत्र डालकर यज्ञ को अपवित्र कर दिया।प्रभु आपसे आग्रह है कि इस बालबन नामक दैत्य से हमलोगों को निजात दिलाए ।

उल्लेखनीय है कि भगवान श्री बलराम जी संत महात्माओं के बातों को सुनकर अब वे बालबन दैत्य को मारने के लिए उसका प्रतीक्षा करने लगे,वह इंतजार शीघ्र ही खत्म होने वाला था, संत महात्मा गण नित्य प्रति की भांति आज भी अपना पूजा अर्चना करने की तैयारी कर रहे थे कि बालबन दैत्य दहाड़ मारते हुए आया। वहां पहले से इंतजार कर रहे भगवान श्री बलराम जी ने बालबन को ललकारते हुए कहा कि ,अरे दुष्ट तुम्हारी आयु अब पूरी हो गई है,अब तुम हमसे नहीं बच पाएगा। इसके प्रतिउत्तर में बालबन दैत्य ने कहा अरे मूर्ख बीर पुरुष केवल धमकी ही नहीं देते हैं, बल्कि वे वीरता पूर्वक युद्ध करते हैं।

गौरतलब है कि बालबन की ललकार सुनने के बाद भगवान् श्री बलराम जी ने अपने अस्त्र मूसल और हल को आवाहन किया तथा पूरी शक्ति के साथ बालबन के साथ युद्ध करने लगे, देखते ही देखते भगवान् श्री बलराम जी द्वारा बालबन को अपने हल और मूसल की सहायता से मार दिया। अब तो संत महात्माओं के साथ देवताओं द्वारा भी आसमान से फुलों की बारिश के साथ ढोल नगाड़े बजाकर अपना खुशी का इजहार किया।

उल्लेखनीय है कि भगवान श्री बलराम जी अरावली पर्वत होते हुए रामेश्वर स्थित भगवान् श्री शंकर जी दर्शन एवं पूजा अर्चना करके दक्षिण छोर पर कन्या कुमारी का दर्शन कर वापस लौटते हुए हस्तिनापुर पहुंचे जहां पहले से ही भगवान् श्री कृष्ण जी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि जब भगवान् श्री बलराम जी हस्तिनापुर पहुंचे तो वहां पहले से ही दुर्योधन और भीमसेन के बीच गद्दा युद्ध हो रहा था उल्लेखनीय है कि जब भगवान् श्री कृष्ण जी ने देखा कि बलराम जी , यहां पधारे हुए हैं तो उनके मन में यह शंका उत्पन्न होने लगी कि पता नहीं कि बलाराम भया इस युद्ध को रोकने के लिए ना कह दें। परंतु भगवान् बलराम जी यह जानते थे कि यह युद्ध धर्म ओर अधर्म के बीच पहले से ही निर्धारित किए गए फैसला के अनुसार युद्ध हो रहा है, इसमें किसी भी प्रकार हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

शेष अगले पोस्ट में,

आप सबों का ,

दिवाकर,

ND

Nandkumar Diwakar

Author & Founder, Radha Krishan Global Knowledge

+91 9939624027

Nandkumar Diwakar is an avid researcher and writer dedicated to sharing authentic knowledge, insights, and perspectives through this blog platform.

Previous Post
ll भागवत भक्त श्री सुदामा जी को कुछ दिन भगवान् श्री कृष्ण जी के साथ द्वारिका में व्यतीत करने के पश्चात अपने घर लौटना। ।।
Next Post
।। भारत के अधिकांश जेलों में बंद कैदियों के साथ भेदभाव, तथा जेलों में रहन सहन की सबसे बदहाल स्थिति, ।।

Leave a Thought or Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *