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।। रुक्मणि जी के पुत्र प्रद्युम्न जी को शामबासुर नामक दैत्य द्वारा अपहरण कर लेना,।।

महात्मा शुकदेव जी, श्री भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए राजा परीक्षित जी से कहते हैं कि, राजन शामबासुर नामक दैत्य भगवान् श्री कृष्ण जी से बहुत पहले से ही नाराज था, क्योंकि उसके संबंधियों को भगवान् खेल खेल में ही मौत के घाट उतार दिए थे। उल्लेखनीय है कि शामबासुर भगवान् श्री कृष्ण जी से बदला लेने के लिए प्रति क्षण मौका के तलाश में लगा रहता था। संयोगवश वह मौका उसे जल्दी ही मिल गया। गौरतलब है कि भगवान कामदेव अवतार के रूप में माता रुक्मिणी जी के गर्भ से भगवान् कृष्ण जी के पुत्र के रूप में प्रद्युम्न जी के नाम से अवतरित हुए। यह बात ध्यान देने योग्य है कि प्रद्युम्न जी अभी नवजात शिशु के रूप में माता रुक्मिणी जी की गोद में सो रहे थे कि उसी समय सांबासुर ने प्रद्युम्न जी को उठाकर रात के समय अपने साथ ले जाकर समुद्र में उनको फेंक दिया। तत्पश्चात एक बड़ी मछली द्वारा अपने पेट में प्रद्युम्न जी को निगल लिया गया। दैववश संजोग से मछुआरों द्वारा उस मछली को पकड़कर सांबासुर के घर दे दिया,जहां पहले से ही प्रद्युम्न जी के पूर्व जन्म में कामावतार के पत्नी रतिके रूप में जानी जाती थी, इस समय सांबासुर के यहां मायावती रति नाम से नौकरानी के रूप में कार्य करती थी। मछली आने के बाद मायावती रति द्वारा जब मछली का पेट चीरा गया तो उसमें से बहुत ही प्यारा,कोमल,सुंदर एक बच्चा निकला। उल्लेखनीय है कि बच्चा को देखते ही मायावती रति उस पर मोहित हो गई।अब बच्चा को मायावती रति बड़े प्रेम से पालने पोसने एवं लाड़ प्यार करने लगी। संजोग वश घूमते हुए एक दिन देवर्षि नारद जी मायावती रति के पास आ गए और उन्होंने सब जानते हुए अंजान रूप में मायावती रति से बच्चे के विषय में पूछा तो तो मायावती रति ने नारद जी को सब कुछ सच सच विस्तार पूर्वक बच्चे के विषय में बतला दिया।

गौरतलब है कि अब तो देवर्षि नारद जी ने मायावती रति से कहा कि जो बच्चा तुम बड़े लाड प्यार से पाल रही हो यह तुम्हारा पिछले जन्म का पति कामदेव महाराज जी हैं।इस जन्म में प्रद्युम्न जी के रूप में भगवान् श्री कृष्ण जी एवं माता रूक्मिणी जी के पुत्र के रूप में अवतरित हुए हैं। अब तो इतना सुनना था कि स्वाभाविक रूप से मायावती रति काम भावना से युक्त होकर बहुत ही लाड प्यार करने लगी । उल्लेखनीय है कि बच्चा अवस्था में तो नहीं,परन्तु जैसे जैसे प्रद्युम्न जी बड़े होने लगे थे,तो उन्होंने महसूस किया किया कि मायावती रति का प्रेम वात्सल्य भाव से नहीं होकर काम भावना से युक्त होकर किया जा रहा है।

अंततः कुछ दिन देखने के उपरान्त प्रद्युम्न जी ने मायावती रति से कहा कि आप मेरी माता के समान हो फिर दूसरे भाव से युक्त होकर मुझे क्यों प्यार करती हो। प्रद्युम्न जी के प्रश्नों को सुनकर मायावती रति ने बड़े प्यार से समझाते हुए प्रद्युम्न जी से कहा कि भगवान् की कृपा से आप पुनः मुझे पति के रूप में प्राप्त हो गए हो। मायावती रति ने कहा कि आप पूर्व जन्म में मेरे पति कामदेव जी थे, देवताओं का कार्य करने के उद्देश्य से मेरे पति ने भगवान शंकर जी को काम भावना में पीड़ित करना चाहा कि वैसे ही भगवान शंकर के तीसरी आँख द्वारा प्रज्वलित अग्नि भस्म हो गए।बहुत ही अनुनय विनय करने पर पुनः मुझे द्वापर युग में पति के रूप में प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया। तत्पश्चात देवर्षि नारद जी द्वारा कही घटनाओं का उल्लेख करते हुय मायावती रति ने सभी बातों का वर्णन प्रद्युम्न जी से कर दिया।अब प्रद्युम्न जी भी सभी बातों को समझकर मायावती रति जी से पत्नी संबंधी भावनाओं से युक्त होकर प्रेम करने लगे।

गौरतलब है कि मायावती रति सभी महा विधाओं की जानकार थी,वो नित्य प्रद्युम्न जी को नई नई विधाएँ सिखाया करती थी। धीरे धीरे प्रद्युम्न जी सभी विधाओं में पारंगत होकर अपने घर जाने की इच्छा मायावती रति से व्यक्त की, तत्पश्चात मायावती रति ने प्रद्युम्न जी को अपने साथ लेकर आकाश मार्ग से सीधे भगवान श्री कृष्ण जी की नगरी द्वारिका में भगवान के महल के ऊपर ले गए। उल्लेखनीय है कि जब दासियों द्वारा रुक्मणी जी को जानकारी प्राप्त हुआ कि कोई बहुत ही सुन्दर लड़का और उसके साथ एक सुन्दर युवती उनके महल के छत के ऊपर आकाश मार्ग से आया हुआ है,तो रुक्मिणी जी बिना कोई देरी किए तुरन्त अपने महल के छत पर कौतूहल वश देखने के लिए गई। जब अपने छत पर रुक्मिणी जी ने प्रद्युम्न जी को देखा तो उनके मुंह से वात्सल्य भाव से युक्त होकर सहस ही निकल गया कि मेरा बच्चा अगर मेरे पास होता तो शायद इसी के जैसा होता! माता रुक्मिणी जी की बातों को सुनने के पश्चात मायावती रति ने प्रद्युम्न जी के साथ घटित घटनाओं का वर्णन विस्तार पूर्वक कर उनसे कर दिया तथा अपने विषय में भी रुक्मिणी जी से सब कुछ बता दिया। अब तो यह खबर पूरे द्वारिका नगरी में जंगल की आग की तरह सब जगह पहुंच गई। तत्पश्चात महल में विशाल उत्सव का आयोजन किया गया तथा खूब खुशियां मनाई गई।

आप सबों का,

दिवाकर,

ND

Nandkumar Diwakar

Author & Founder, Radha Krishan Global Knowledge

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Nandkumar Diwakar is an avid researcher and writer dedicated to sharing authentic knowledge, insights, and perspectives through this blog platform.

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