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श्यामंतक मणि को प्राप्त करने के लिए भगवान कृष्ण जी और रीछ राज जामवंत जी के बीच घोर युद्व।।

।। श्यामंतक मणि को प्राप्त करने के लिए भगवान कृष्ण जी और रीछ राज जामवंत जी के बीच घोर युद्व।।

                                ।। धर्म मार्ग।।

महात्मा शुकदेव जी, श्री भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए राजा परीक्षित जी से कहते हैं कि ,राजन जब से राजा सत्राजित द्वारा भगवान् श्री कृष्ण जी पर श्यामंतक मणि की चोरी करने का आरोप लगाया, तब से भगवान् कृष्ण जी द्वारा आम जनमानस के बीच सच्चाई लाने के लिए निरंतर प्रयास किया जाता रहा था। इसी कड़ी के उदभेदन करने के क्रम में उन्होंने देखा कि जंगल में सत्राजित के भाई प्रसेन का शव फेंका हुआ है। वहां शव के पास जाकर भगवान कृष्ण जी ने देखा कि एक सिंह के पैरों के निशान आस पास चिह्नित है। भगवान् श्री कृष्ण जी को समझने में देर ना हुई कि ये सिंह द्वारा ही सत्राजित के भाई प्रसेन को मार दिया गया है। तत्पश्चात भगवान ने सिंह के पैरों के निशानों के सहारे धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे, कुछ दूर जाकर उन्होंने देखा कि सिंह के पैरों के निशानों का अंत एक गुफा द्वार में हो रहा है। अंततः भगवान् श्री कृष्ण जी ने अपने साथियों से कहा कि तुमलोग इसी गुफा के बाहर मेरा इंतजार करना, अगर मैं एग्यारह दिनों तक नहीं लौटूंगा तो तुमलोग वापस अपने घर लौट कर चले जाना।
उल्लेखनीय है कि भगवान श्री कृष्ण जी अपने साथियों को निर्देश देकर गुफा में प्रवेश करने लगे, कुछ दूर गुफा में आगे बढ़ने पर उन्होंने देखा कि श्यामंतक मणि के साथ छोटे छोटे बच्चों द्वारा खेल खेला जा रहा है। तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा उस श्यामंतक मणि को लेने का प्रयास किया गया, परन्तु बच्चों द्वारा जोर से चिलाने के कारण रीछ राज जामवंत जी द्वारा गुस्सा पूर्वक भगवान कृष्ण जी से युद्ध करने लगे।दोनो के बीच लगभग 28 दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ। भगवान् श्री कृष्ण द्वारा अपने घुसे के प्रहार से रीछ राज जामवंत जी की हड्डी को काफी तोड़ दिया गया था। उल्लेखनीय है कि जामवंत जी को यह धीरे धीरे आभास होने लगा कि ये कोई आम मानव नहीं है बल्कि साक्षात भगवान विष्णु जी ही हैं। उन्होंने भगवान् श्री कृष्ण जी को कहा कि प्रभु जिसका इंतजार करते हुए मैं त्रेता युग से द्वापर युग तक प्रतीक्षा करते हुए आ रहा हूं।और प्रभु आपने दर्शन भी दिया तो युद्ध के प्रतिद्वंद्वी के रूप में ! प्रभु मैं समझ गया कि आप त्रेता युग वाले भगवान् श्री राम जी हैं, प्रभु मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।मै आपसे माफी चाहता हूं, कहते हुए रीछ राज जामवंत जी द्वारा भगवान् श्री कृष्ण जी की पूजा अर्चना करते हुए श्यामंतक मणि को देने के साथ अपनी पुत्री जामवंती जी का विवाह भगवान श्री कृष्ण जी के साथ कर दिया।जब भगवान् श्री कृष्ण जी जामवंती जी के साथ द्वारिका पूरी में आए तो द्वारिका वासी काफी खुश हुए। भगवान श्री कृष्ण जी जब श्यामंतक मणि सत्राजित को लौटाने लगे तो सत्राजित काफी लज्जित महसूस करने लगा। सत्राजित ने अपनी गलती की भरपाई करने के लिए अपनी पुत्री सत्यभामा जी का विवाह भगवान श्री कृष्ण जी के साथ कर दिया।

आप सबों का,

दिवाकर,

ND

Nandkumar Diwakar

Author & Founder, Radha Krishan Global Knowledge

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Nandkumar Diwakar is an avid researcher and writer dedicated to sharing authentic knowledge, insights, and perspectives through this blog platform.

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